अब राहत महसूस कर रही है नौकरशाही
देहरादून. राजनीतिक अस्थिरता से त्रस्त नौकरशाही अब थोड़ा राहत महसूस कर सकती है. नेतृत्व परिवर्तन के बाद कामकाज की स्थिति सुधरने की उम्मीद की जा रही है. नहीं, तो पिछले कुछ समय से कामकाज पर बे्रक लग गया था. दावेदारों की दिल्ली दौड़ के चलते अहम मुद्दों पर असमंजस की स्थिति गहरा गई थी. नौकरशाही ने भी स्थिति संभालने के लिए पहल करना मुनासिब नहीं समझा. सीधा असर आम आदमी पर पड़ा, जो कि शिकायतों के हल के लिए इधर से उधर चक्कर काटता रहा.सरकार के मुखिया बदलने पर अंतिम निर्णय हो जाने के बाद अब स्थिति बदल सकती है. अभी तक का जो हाल रहा है, उसमें काम की समीक्षा ज्यादा हुई, काम कम हुए. नौकरशाही पर अंकुश लगाने की कोशिश भी हुई, मगर जहां मौका मिला, नौकरशाही ने अपने हिसाब से काम किया. इस स्थिति के चलते आम आदमी के काम लटके और सरकार की छवि खराब हुई. उत्तरांचल विकास से लेकर वित्त, राजस्व, पेयजल, सूचना और स्वास्थ्य विभाग का काम देख चुके डॉ.निशंक के सामने नौकरशाही से बेहतर काम लेने की चुनौती होगी. वैसे, डॉ.निशंक को लेकर अफसरों के ये अनुभव रहे हैं कि वे संतुलन स्थापित कर काम लेते हैं. सीएम के तौर पर उन्हें और प्रभावी ढंग से संतुलन साधने की आवश्यकता होगी.
गुरुवार, 25 जून 2009
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आप ने जो भी कहा वो कहा तक सत्य होगा ख़ास कर पोखरियाल जी के बारे में ये तो आने वाला कल बतलायेगा ! स्वामे से लेकर जनरल तक सब एक ही थाली के लोटे है .
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