पहले ही फाइनल हो गए थे निशंक
देहरादून। मुख्यमंत्री की कुरसी पर डॉ। रमेश पोखरियाल निशंक की ताजपोशी मंगलवार की रात ही तय हो गई थी. २२ विधायकों ने जिनमें खुद मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी और कई मंत्री शामिल हैं, ने एक पत्र पर उनके नाम पर दस्तखत कर दिए थे. दावेदारी से भगत ङ्क्षसह कोश्यारी के हट जाने के बाद डॉ. निशंक के लिए फतह की राह खासी आसान हो गई थी. उत्तराखंड निवास में देर रात तक हुई बैठक में खंडूरी के साथ ही कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत, मातबर ङ्क्षसह कंडारी, मदन कौशिक, अजय टम्टा, बिशन ङ्क्षसह चुफाल भी मौजूद थे. बैठक में अगले दिन की रणनीति बनाई गई. सूत्रों के अनुसार खंडूरी ने बैठक में साफ कर दिया कि वह अब मुख्यमंत्री बने रहने की स्थिति में नहीं हैं. वह इस दौड़ से अलग हो चुके हैं. उन्होंने इसके बाद डॉ. निशंक का नाम अपने उत्तराधिकारी के तौर पर सभी के सामने रखा.इसमें तय हुआ कि सभी लोग मतदान में डॉ. निशंक को ही वोट देंगे. इसके साथ ही एक पत्र भी टाइप कराया गया. इसमें मौजूद सभी २२ विधायकों ने दस्तखत कर डॉ. निशंक को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया. यह पत्र हाईकमान को आज सौंपा गया. हालांकि, इसके बावजूद शीर्ष नेतृत्व ने उत्तराखंड निवास में गुप्त मतदान का सहारा लिया.मतदान के दौरान वैंकेया नायडू और थावरचंद गहलौत मौजूद थे. चुनाव में खंडूरी ने औपचारिकता के तौर पर डॉ. निशंक का नाम प्रस्तावित किया और प्रकाश पंत, मातबर ङ्क्षसह कंडारी ने समर्थन किया. मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत को भगत ङ्क्षसह कोश्यारी का समर्थन हासिल था लेकिन सूत्रों के अनुसार ऐन वक्त पर माहौल देख कुछ और कोश्यारी समर्थक पाला बदल गए. दरअसल, कोश्यारी के मैदान से अलग हो जाने के कारण उनके कुछ समर्थकों ने मजबूत दिख रहे डॉ. निशंक का साथा देना बेहतर समझा. नेता विधान मंडल दल चुने जाने के बाद बाद में डॉ. निशंक ने कोश्यारी से भी उत्तराखंड निवास में ही मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया.
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