सोमवार, 1 जून 2009

समाचार

हरीश रावत राज्यमंत्री बने
अर्से बाद मिली खुशी.....दीवाली बन गई
देहरादून. जोरदार जीत और उसके बाद मंत्री के रूप में ताजपोशी. खुशी की तो बात है ही. उत्तराखंड से कांग्रेस को लंबे अर्से बाद मंत्रिमंडल में स्थान जो मिला. फिर कांग्रेसी कैसे अपनी भावनाओं को रोक पाते. सांसद श्री हरीश रावत को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की खुशी में कांग्रेसजनों ने राजधानी स्थित प्रदेश कांग्रेस के मुख्यालय में जमकर आतिशबाजी कर दीवाली मनाई. ढोल-नगाड़ों की थाप पर कांग्रेसी खूब थिरके. साथ ही गूंजता रहा जय हो का उद्घोष.
उत्तराखंड में लोकसभा की सभी पांचों सीटों पर कांग्रेस का परचम लहराने पर उत्साह से लबरेज कांग्रेसियों की खुशी तब और दुगनी हो गई, जब हरिद्वार से सांसद चुने गए वरिष्ठ नेता श्री हरीश रावत को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की घोषणा हुई. लंबे अर्से बाद यह मौका आया है, जब राज्य को केंद्र की कांग्रेसनीत सरकार में प्रतिनिधित्व मिला है. इस खुशी में कांग्रेसजनों ने जश्न मना कर खुशी का इजहार किया. बड़ी संख्या में कांग्रेस व उसके आनुषंगिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं का प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. श्री हरीश रावत को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की खुशी में ये सभी ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके. साथ ही जमकर आतिशबाजी की गई. खुशी के पटाखों के शोर से कांग्रेस भवन गुंजायमान रहा. यही नहीं, परिसर में हर आने-जाने वाले का मुंह मीठा भी कराया जा रहा था. लगातार होती आतिशबाजी और जय हो के उद्घोष के साथ ही सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, हरीश रावत जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे.


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मैं केशरसिंह बिष्ट...

माननीय प्रवासी बंधुओं,
सादर नमस्कार।
मैं केशरसिंह बिष्ट मूलत: टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) से हूं. पिछले 18 सालों से मुंबई के हिंदी पत्रकारिता जगत में सक्रिय हूं और वर्तमान में शहर के एक प्रमुख दैनिक 'नवभारतÓ में मुख्य उप-संपादक के पद पर कार्यरत हूं. मुंबई में मेरे परिवार की दूसरी पीढ़ी है और हम संयुक्त परिवार में जीवन गुजर-बसर कर रहे हैं. समाज के बीच मेरी सक्रियता पत्रकार के रूप में अधिक है. 'जन्मभूमि उत्तरांचलÓ के रूप में एक साप्ताहिक पत्रिका के प्रकाशन में सक्रिय हूं. कोशिश है कि विभिन्न शहरों में बसे प्रवासी बंधुओं के बीच सूचना का माध्यम मजबूत किया जाए और तकनीकी के इस सशख्त दौर में हम देश के बाहर बसे प्रवासियों से भी अपने संबंधों को विस्तार दें. आप और हम मिल कर कोशिश करें तो यह असंभव नहीं है. एक राज्य के रूप में बेशक हमारी पहचान बन गयी हो, लेकिन पहचान का मसला इतने भर से खत्म नहीं होगा. उत्तराखंड की सामाजिक पहचान के लिए अभी और प्रयास किये जाने की जरूरत है और यह प्रयास निजी तौर पर किये जाने की आवश्यकता है. आपके-हमारे निजी प्रयास जब एक सूत्र में बंधेंगे तो सामाजिक पहचान का ख्वाब अवश्य साकार होगा.
धन्यवाद
आपका
केशरसिंह बिष्ट


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