टीम भावना पैदा करने की चुनौती
देहरादून. मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेते ही डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के सामने सूबे में कमल के फूल को खिलाए रखने और पार्टी में टीम भावना पैदा करने की अहम जिम्मेदारी होगी. उनके कंधों पर पार्टी को वर्ष २०१२ के विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने का दारोमदार भी रहेगा. सही मायने में कहा जाए तो ढेरों चुनौतियां नए मुख्यमंत्री का इंतजार कर रही हैं.खंडूरी को उनके भारी-भरकम नाम और शीर्ष स्तर पर पकड़ के बावजूद सवा दो साल में ही सरकार से विदा होना पड़ा. इसके लिए उनकी संगठन और निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं से दूरी को जिम्मेदार माना जा रहा है. डॉ. निशंक को इससे ही सबक लेना होगा. वह सरकार और संगठन में तालमेल बनाए रखते हुए आगे बढ़ेंगे, ऐसा सियासी समीक्षकों का मानना है. खंडूरी को मुख्यमंत्री बनने से पहले और हटने तक लगातार कोश्यारी समर्थकों की तरफ से हमलों और विरोध का सामना करना पड़ा था.डॉ. निशंक की कोशिश इस मोरचे की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा कर इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करना भी एक चुनौती है. मंत्रिपरिषद केगठन में भी उनकी दूरगामी सोच काफी हद तक दिख जाएगी.डॉ. निशंक को फिलहाल, सबसे पहले विकासनगर विधानसभा उपचुनाव जिताना होगा. यहां हालात भाजपा के लिए अच्छे नहीं माने जा रहे हैं. इसके बाद विधानसभा के आम चुनाव में भी जीत दिलानी होगी.नौकरशाही को सूबे में निरंकुश माना गया है. खंडूरी उन्हें काबू में नहीं रख पाए. निशंक नौकरशाही से काम लेने के मामले में अनुभवी हैं. लिहाजा, इसमें उन्हें दिक्कत नहीं होगी.इसके साथ ही बिजली, पीने के पानी का संकट, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें सभी कर्मियों पर लागू करना, सरकारी स्कूलों की दुर्दशा, कमजोर वित्तीय स्थिति से पार पाने के लिए भी नए मुख्यमंत्री को जूझना पड़ेगा.
गुरुवार, 25 जून 2009
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